आख़िर कैलाश विजयवर्गीय ने आयकर विभाग से पहले ट्वीट कैसे किया? इस सवाल
के जवाब में मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय कहते हैं,
''इसका कोई मतलब नहीं है कि कैलाश जी ने पहले ट्वीट कैसे किया. कमलनाथ
सरकार जवाब दे कि ट्रांसपोर्ट विभाग में लूट क्यों मची है? बरामद हुए पैसे
कहां से आए?''
पूरे मामले में एक और व्यक्ति का नाम आया है और उनका
नाम है अश्विन शर्मा. शर्मा के भोपाल स्थित घर पर भी आईटी डिपार्टमेंट ने रेड मारी है. अश्विन शर्मा को बीजेपी का क़रीबी बताया जा रहा है. भोपाल के
वरिष्ठ पत्रकार डॉ राकेश पाठक कहते हैं कि अश्विन शर्मा के बाद बीजेपी
बैकफुट पर आ गई है.
पाठक कहते हैं, ''अश्विन शर्मा को शिवराज सिंह
चौहान के सरकार में कई कॉन्ट्रैक्ट मिले. उनके एनजीओ को शिवराज सरकार ने
ख़ूब काम दिए हैं और शर्मा इन्हीं के राज में फले-फूले हैं. चुनाव के वक़्त
में यह रेड राजनीति से प्रेरित है. हालांकि बीजेपी को इसका कोई फ़ायदा नहीं मिलेगा. जहां तक प्रवीण कक्कड़ की बात है तो पिछले तीन महीने में कक्कड़ अमीर नहीं बने हैं. पिछले 15 सालों से बीजेपी की सरकार थी और कक्कड़
के बेटे का करोबार बीजेपी सरकार में भी चल रहा था.''
इस बात को प्रवीण कक्कड़ भी कहते हैं कि उनके बेटे का कारोबार कोई कमलनाथ के कार्यकाल
में नहीं स्थापित हुआ है. वो कहते हैं, ''मेरे परिवार का बिज़नेस शिवराज
की सरकार में भी था.''
हालांकि बीजेपी अश्विन शर्मा से संबंधों को ख़ारिज कर रही है. बीजेपी प्रवक्त दीपक विजयवर्गीय कहते हैं, ''यह बिल्कुल
बकवास है कि अश्विन शर्मा का बीजेपी से संबंध है. अगर हमारी सरकार में उन्हें ठेके मिले हैं तो देने वालों से बात कीजिए.''
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इन छापेमारियों को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों
ने राजस्व सचिव एबी पांडे और सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेस के चेयरमैन पीसी मोडी से मुलाक़ात की है. विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग से
शिकायत की थी कि सत्ताधारी बीजेपी एजेंसियों का इस्तेमाल चुनावी फ़ायदे के
लिए कर रही है. अब चुनाव आयोग ने कहा है कि एजेंसियां रेड करने से पहले
उन्हें सूचित करें.
कक्कड़ मध्य प्रदेश पुलिस के पूर्व अधिकारी हैं. वो आरटीओ विभाग में भी काम कर चुके हैं. मध्य प्रदेश की राजनीति पर क़रीब से नज़र रखने वालों का
कहना है कि प्रवीण कक्कड़ ने आरटीओ विभाग में रहकर ख़ूब कमाई की थी. कक्कड़ कमलनाथ के ओएसडी बनने से पहले यूपीए में मंत्री रहे कांतिलाल भूरिया के
ओएसडी थे.
कहा जाता है कि कक्कड़ जब कांतिलाल भूरिया के ओएसडी थे तब
कई भूमि सौदे में शामिल थे. जब पिछले साल के आख़िर में कांग्रेस की सरकार
बनी तो मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कक्कड़ को अपना ओएसडी नियुक्त किया. नोटबंदी के दौरान कक्कड़ ने बैंक में 80 लाख रुपए जमा किए थे. कहा जा रहा है कि तब
से ही कक्कड़ निशाने पर थे क्योंकि आयकर विभाग ने उनसे इस नक़दी का हिसाब मांगा था और जो जवाब मिला उससे वो संतुष्ट नहीं था.
फ़्रीप्रेस
जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भोपाल में प्रतीक जोशी और अश्विन
शर्मा के घर से 16 करोड़ रुपए मिले हैं. अश्विन से पत्रकारों ने पूछा कि उनका मुख्यमंत्री कमलनाथ से क्या संबंध है तो उन्होंने कहा था, ''मैं बीजेपी का आदमी हूं.''
प्रवीण कक्कड़ और अश्विन शर्मा में क्या
संबंध हैं? इस सवाल के जवाब में कक्कड़ ने कहा कि वो अश्विन शर्मा को जानते
हैं लेकिन कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि दोनों की उम्र में भी काफ़ी
फ़र्क़ है. कक्कड़ ने कहा कि अश्विन शर्मा 33 या 34 साल के हैं जबकि उनकी उम्र 50 के आसपास है.
एक सवाल ये भी उठ रहा है कि आईटी डिपार्टमेंट
दिल्ली से सीआरपीएफ़ के जवानों को लेकर क्यों आया? भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार
विजय दत्त श्रीधर कहते हैं, ''आईटी डिपार्टमेंट को राज्य पुलिस से मदद
लेनी चाहिए थी लेकिन वो दिल्ली से सीआरपीएफ़ के जवानों को लेकर आया. ये तो संघीय ढांचा का सम्मान नहीं है.''